Thursday, October 22nd, 2026

मेनिट: करोडों रुपए और समय की बर्बादी पर उठेंगे BOG में सवाल, संस्थान को नहीं मिला भवनों का पजेशन

भोपाल
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मेनिट) में तीन भवनों का निर्माण कार्य शुरू आठ साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी है। इससे केंद्र सरकार के करोडों रुपए परवान चढ रहे हैं। तीनों भवनों का पजेशन पांच साल पहले मिलना था, लेकिन मेनिट प्रबंधन की लापरवाही से भवन निर्माण पर दस फीसदी के हिसाब से ब्याज देना पड रह है। वहीं करोडों रुपए के कम्प्यूटर भी समय की चपेट में आने से बेकार हो गए हैं।

मेनिट ने साहेब इंस्फ्राटेक्चर प्राइवेट लिमिटेड को एलआरसी बिल्डिंग के लिए 42 करोड, कारपोरेट स्टोर पांच करोड और स्टेट आफिस छह करोड की लागत से तैयार होनो ठेका दिया था। ठेकेदार को 2016 में तीनों भवन तैयार कर मेनिट को पजेशन देना था, लेकिन प्रबंधन ने गुणवत्ता को लेकर सवाल करना शुरू कर दिए और भुगतान करना बंद कर दिया। इसके चलते सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी और आईआईटी दिल्ली से तीनों भवनों की जांच कराई गई, जिसमें क्लीनचिट जारी की गई। इसके बाद भी मेनिट प्रबंधन ने ठेकेदार को भुगतान नहीं किया।

जिला एवं सत्र न्यायालय भोपाल के अपन सत्र न्यायाधीश पीसी गुप्ता ने मेनिट प्रबंधन को करारी फटकार लगाते हुए ठेकेदार को सभी भुगतान करने के लिए आदेशित किया है। यहां तक उन्हें दस फीसदी ब्याज का भुगतान करना पडेगा। इससे करीब 55 करोड के तीनों भवन मेनिट प्रबंधन को करीब साठ करोड की लागत के पडेंगे।

23 मार्च को बोर्ड आफ गर्वनर की बैठक रखी गई है। इसमें तीन भवनों लागत से करीब पांच करोड ज्यादा और पांच साल का अतिरिक्त समय बर्बाद होने पर मेनिट निदेशक नरेंद्र सिंह रघुवंशी से सवाल पूछे जाएंगे। क्योंकि एलआरसी भवन में एक करोड रुपए के कम्प्यूटर खरीद कर लैब तैयार की गई है, जो छह साल में बेकार हो चुकी है। इसके बाद  दो करोड के और कम्प्यूटर खरीदे गए हैं। वे भी एलआरसी भवन में खराब होने रख दिए गए हैं। 

 

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Source : Agency

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